सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

HUMANS CONTROL | COORDINATION in Hindi मानव शरीर का नियंत्रण और समन्वय

 

CONTROL AND COORDINATION IN HUMANS in Hindi मानव शरीर का नियंत्रण और समन्वय


मनुष्यों में दो प्रकार के नियंत्रण और समन्वय गतिविधियाँ होती हैं। जो इस प्रकार है

  1. तंत्रिका तंत्र (Nervous system)
  2. अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine system)

मनुष्यों में, तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र शरीर की गतिविधियों जैसे सोचने, देखने, सुनने, भावनात्मक, सचेत करने आदि लिए मिलकर काम करता है।

मानव तंत्रिका तंत्र  के दो मुख्य घटक होते है:

  1. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सी.एन.एस.) ( Central nervous system): इसमें कपाल तंत्रिका (cranial nerves) और मेरूरज्जु (spinal cord) शामिल होते हैं
  2. परिधीय तंत्रिका तंत्र (पी.एन.एस.) ( Peripheral nervous System) :  इसमें CNS से उत्पन्न होने वाली सभी तंत्रिका शामिल होती हैं। ये तंत्रिका CNS को शरीर के सभी हिस्सों से जोड़ती हैं।


न्यूरॉन (Neuron)

 

न्यूरॉन (Neuron) - न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की एक यूनिट है ।  
            

न्यूरॉन की संरचना

Neuron
translated in hindi by user:Anishadhariwal_ds, CC BY-SA 4.0, via Wikimedia Commons

न्यूरॉन्स तंत्रिका तंत्र का निर्माण करते है। वे रासायनिक और विद्युतीय संकेतों दोनों का उपयोग करके पूरे शरीर में सूचना का आदान प्रदान करते हैं। न्यूरॉन को दो भागो में बाटा गया है :

  1. अन्य कोशिकाओं से सूचना को प्राप्त करने और प्रसंस्करण करने के लिए
  2. अन्य कोशिकाओं तक सूचना को पहुंचाने के लिए

एक न्यूरॉन में तीन घटक होते हैं:


  1. कोशिका या साइटोन (Cyton)
  2. डेन्ड्राइट (Dentrites)
  3. एक्सोन (Axon)

1. कोशिका - एक कोशिका में केन्द्रक (nucleus) और साइटोप्लाज्म (cytoplasm) होता है। और साइटोप्लाज्म में विभिन्न कोशिका अंग होते हैं जैसे माइटोकॉन्ड्रिया (mitochondria), गॉल्गी बॉडी (Golgi apparatus), एंडोप्लास्मिक (endoplasmic) रेटिकुलम (reticulum) आदि।

2. डेंड्राइट - ये आवेग (impulse) को कोशिका की ओर ले जाते हैं।

3. एक्सोन
  • यह कई सेंटीमीटर लम्बे होते है। यह आवेगों का संचालन करते है।
  • एक्सोन के चारों ओर माइलिन (myelin) इन्सुलेटड और सुरक्षात्मक दीवार बनाते है


न्यूरॉन्स तीन प्रकार के होते हैं:

  1. संवेदी न्यूरॉन्स (Sensory neurons): ये तंत्रिका आवेगों को रिसेप्टर्स से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक ले जाते हैं।
रिसेप्टर्स सी.एन.एस.
  1. मोटर न्यूरॉन्स (Motor neurons): ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से प्रभावी अंगों तक आवेग ले जाते हैं जो एक मांसपेशी या ग्रंथि हो सकते हैं।
सी.एन.एस. प्रभावी अंग
  1. इंटर्नोरॉन या रिले न्यूरॉन्स (Interneuron or relay neurons): ये केवल सी.एन.एस. में पाए जाते हैं और संवेदी और मोटर न्यूरॉन्स के बीच संबंध बनाते हैं।

सिनैप्स (SYNAPSE)


सी.एन.एस. मे सिनैप्स का कार्य सुचना को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचाना है लेकिन यह एक दूसरे से जुड़े नहीं होते है

अंतःस्रावी तंत्र


अंतःस्रावी तंत्र में आपके शरीर की सभी ग्रंथियां होती हैं जो हार्मोन बनाती हैं।

कई अलग-अलग ग्रंथियां अंतःस्रावी तंत्र का निर्माण करती हैं। मस्तिष्क में हाइपोथैलेमस, पिट्यूटरी और पीनियल ग्रंथि होते हैं। थायराइड और पैराथायरायड ग्रंथियाँ गर्दन में होते हैं। थाइमस फेफड़ों के बीच  होते है, अधिवृक्क (adrenal) गुर्दे के ऊपर, और अग्न्याशय (pancreas) पेट के पीछे होते है। अंडाशय (ovaries) या वृषण (testies) आपके श्रोणि क्षेत्र में होते हैं।

➽पिट्यूटरी (Pituitary): यह अंतःस्रावी तंत्र की "मास्टर" ग्रंथि है। यह मस्तिस्क से आने वाली जानकारी को शरीर की ग्रंथियों तक पहुँचाता हैं इसका मुख्य कार्य पिट्यूटराइन  हार्मोन बनाने का है जो शरीर की लम्बाई के लिए बहुत महत्पूर्ण है। यह कई अलग-अलग हार्मोन बनाता है जैसे प्रोलैक्टिन (prolactin), जो स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध बनाने में मदद करता है, ल्यूटिनाइजिंग (luteinizing) हार्मोन, जो महिलाओं में एस्ट्रोजन (estrogen) और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन  (testosterone) का निर्माण करता है।

➽हाइपोथैलेमस (Hypothalamus): यह अंग अंतःस्रावी तंत्र को तंत्रिका तंत्र से जोड़ता है। इसका मुख्य कार्य पिट्यूटरी ग्रंथि को हार्मोन बनाने या रोकने के लिए बताना है।

➽पीनियल (Pineal): यह ग्रंथि मेलाटोनिन (melatonin) नामक एक रसायन बनाती है। यह नींद के लिए सहायक होता है

➽थायराइड (Thyroid): यह ग्रंथि थायराइड हार्मोन बनाती है, जो चयापचय (metabolism) को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से घेंघा (Goiter) की बीमारी होती है। यदि यह ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पाती है , तो शरीर की सभी क्रियाएँ धीमी पड़ जाती हैं और ऐसी स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) कहते हैं। आपकी हृदय की गति धीमी हो सकती है। आपको कब्ज़ हो सकता है। और आपका वजन बढ़ सकता है। और अगर यह ग्रंथि अधिक हॉर्मोन बनती हैं तो शरीर की सभी क्रियाएँ तेज हो जाती हैं जिसे हाइपरथायरायडिज्म (hyperthyroidism) कहते हैं। आपकी हृदय की गति बढ़ सकती है आपको दस्त हो सकते हैं। और आपका वजन घट सकता हैं

➽पैराथायराइड (Parathyroid): यह थायरॉयड के पीछे चार ग्रंथियों का एक झुण्ड होता है। यह हड्डियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह ग्रंथि कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को नियंत्रित करता हैं।

➽थाइमस (Thymus): इसकी अधिकता से टॉन्सिल बीमारी होने की सम्भावना होती है यह ग्रंथि टी-लिम्फोसाइट्स नामक सफेद रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है जो शरीर में संक्रमण से लड़ती हैं और बच्चो में प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को विकसित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यौवन के बाद थाइमस सिकुड़ने लगता है।

➽अग्न्याशय (Pancreas): अग्न्याशय आपके पाचन तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र का हिस्सा है। यह भोजन को तोड़ने वाले पाचन एंजाइम बनाता है। यह इंसुलिन (insulin) और ग्लूकागन (glucagon) हार्मोन भी बनाता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपके रक्त प्रवाह और आपकी कोशिकाओं में शर्करा की सही मात्रा हो। यदि अग्न्याशय इंसुलिन नहीं बनाता हैं, तो मधुमेह (diabetes) वाले लोगों में रुधिर में शर्करा का स्तर खतरनाक स्थिति तक बढ़ सकता है जो टाइप 1 होता है। और अगर अग्न्याशय कुछ इंसुलिन बनाता है लेकिन पर्याप्त नहीं होता है तो शर्करा का स्तर घट सकता है जो टाइप 2 है।

➽अधिवृक्क (Adrenal): यह वृक्क (Kidney) के ऊपरी भाग में होता है जिसकी टोपीनुमा संरचना होती है। अधिवृक्क ग्रंथि के हार्मोन बदलने से लिंग में परिवर्तन जाता है ये हार्मोन चयापचय और यौन कार्य को प्रभावित करते हैं।

➽अंडाशय (Ovaries): महिलाओं में, ये अंग एस्ट्रोजेन (estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (progesterone) बनाते हैं। ये हार्मोन मासिक चक्र को विनियमित करने और  गर्भावस्था में स्तनों को विकसित करने में मदद करते हैं।

➽वृषण (Testes): पुरुषों में वृषण टेस्टोस्टेरोन (testosterone) बनाते हैं। यह पुरुषों में शरीर के बालों को युवावस्था में बढ़ाने में मदद करता है। यह लिंग को बड़ा करने और शुक्राणु निर्माण करने में अहम् भूमिका निभाता है।



टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Digestive System in Hindi पाचन तंत्र

Digestive System in Hindi पाचन तंत्र कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप क्या खाते हैं, जो कुछ भी आपके मुंह में जाता है वह आपके शरीर के पाचन तंत्र द्वारा संसाधित होता है। पाचन तंत्र के भीतर तीन मुख्य प्रक्रियाएं होती हैं: पाचन (digestion), अवशोषण (absorption) और उन्मूलन (eradication) । BruceBlaus , CC BY-SA 4.0 , via Wikimedia Commons पाचन भोजन का तोड़ता है और पोषक तत्वों को शरीर की कोशिकाओं द्वारा  अवशोषित करता है। अवशोषण एक ऐसा तरीका है जिसके द्वारा शरीर के सभी अंगों को रक्त के माध्यम से पोषक तत्व मिलते हैं। उन्मूलन  द्वारा शरीर के सभी अपचनीय तत्व बाहर आते है । यह प्रक्रिया पाचन क्रिया में होती है। पाचन तंत्र भोजन को पचाने में मदद करता है और पाचन के लिए उपयोग किए जाने वाले रसायनों का उत्पादन करता है। ईसॉफ़ॅगॅस (भोजन-नलिका, Esophagus ) और पेट (Stomach) जैसे ही आप अपने मुंह में भोजन डालते हैं, पाचन शुरू हो जाता है। चबाने से भोजन छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और आपके लार में एंजाइम रासायनिक रूप से भोजन को तोड़ने में मदद करता है। पाचन तंत्र की चिकन...

Carbon Cycle in Hindi कार्बन चक्र

Carbon Cycle in Hindi कार्बन चक्र   कार्बन हमारे वातावरण में कई रूप में पाया जाता है यह अपने मूल रूप में हीरा और ग्रेफाइट में पाया जाता है । वायुमंडल में यह मुख्य रूप से CO2 ( कार्बन डाइऑक्साइड ) के रूप में पाया जाता है खनिजों में कार्बोनेट और   हाइड्रोजन कार्बोनेट के रूप में पाया जाता है। सभी जीव मुख्य रूप से कार्बन के बने हुए होते है। Bvelevski , CC BY-SA 4.0 , via Wikimedia Commons   कार्बन चक्र के माध्यम पेड़ पौधे प्रकाश संश्लेषण ( Photosynthesis ) द्वारा वायुमंडल से   CO 2 को अवशोषित करके ग्लूकोस अणु बनाते है । जीवित प्राणी ऊर्जा प्राप्ति के लिए पेड़ पौधे द्वारा बनाये गए उत्पादको  ( ग्लूकोस ) का उपभोग करते हैं और इन उत्पादको   के भीतर संग्रहीत कार्बन का अधिग्रहण करते हैं। जीवों के श्वसन प्रणाली द्वारा   CO 2 वायुमंडल में वापस चले जाता है । अपघटक ( Decomposer ) मृत और सड़ने वाले जीवों को तोड़ते हैं और CO 2 को...

Diseases in Hindi बीमारियां

Diseases in Hindi बीमारियां NIAID , CC BY 2.0 , via Wikimedia Commons गैर-संक्रामक बीमारियां (Non Communicable Diseases) - गैर-संक्रामक बीमारियां को क्रोनिक रोग भी कहते है। यह संक्रामक वाहको द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पास नहीं होता है। उदाहरण के लिए मधुमेह, अल्जाइमर, कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस, पुरानी फेफड़ों की बीमारी, स्ट्रोक, और हृदय रोग । संक्रामक बीमारियां (Communicable Diseases) - संक्रामक रोग सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी (Parasites) और कवक (Fungi) के कारण होते हैं, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फैल सकते हैं। कुछ कीड़े काटने के माध्यम से प्रेषित होते हैं, जबकि अन्य दूषित भोजन या पानी के कारण होते हैं। उदाहरण के लिए हैजा, कुष्ठ, क्षय रोग, एचआईवी / एड्स, इन्फ्लुएंजा । क्रोनिक रोग (Chronic disease) – यह बीमारी लम्बे समय तक रहती है और अपना असर कई चरणों में दिखाते है । उदाहरण के लिए कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, तपेदिक, गठिया, मधुमेह, आदि । एक्यूट रोग (Acute disease) – यह रोग तेजी से शुरू होती है और थोड़े समय...